Best hindi sad shayari, good morning sad shayari 2020

Best hindi sad shayari, good morning sad shayari 2020

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अनकही....

कुछ अनकही सी तेरी आँखों में भी है,
कुछ अनकही सी मेरी बातों में भी है,
चलना है इन रास्तों पे हमें हमकदम होके....

                                    फिर भी,
कुछ ठहरे से कदम तेरे भी हैं, मेरे भी,
रौशनी सी है रास्तों में बिखरी,
नज़रों ने भी करवटें ली हैं....

फिर भी,
कुछ थमे से बादल तेरी आँखों में भी हैं, मेरे आँखों में भी,
लफ्ज़ भी जुबां का साथ नहीं देते,
महसूस करते हैं हम फिर भी नहीं कहते,
समझना तुम भी चाहते हो, समझना हम भी चाहते हैं....

फिर भी,
कुछ ठहरे से जज़्बात तेरे भी हैं, मेरी भी,
ख़ामोश ये नज़रें हैं,
मुस्कुराहटें सी हैं चेहरों पे....
फिर भी,
कुछ अनकही सी तेरी आँखों में भी, मेरी आँखों में भी....
New attitude shayari 2020 एट्टीट्यूड शायरी इन हिंदी
अक्स ....

अक्स सँवर कर चेहरा हुआ,
जिन्दगी पे फिर आरजू का पहरा हुआ,
दिलकश किसी मंज़र पर, आहिस्ता इक सवेरा हुआ,
ढ़ली धूप यूँ अपना लश्कर लपेट कर,

जो भूले थे हम नक्श अपने,

रंग उनका फिर सुर्ख हुआ,
इश्क़ की हरकत का ज़ोर है समझो,
नडूबा ही जाए, न किनारा ही कोई....

आज भी....
कभी जो ज़िक्र उसका आता है,

तो अश्क सूझते हैं....
ये बात और है की, अब....

सफर की गुज़र काटने को,
मुस्कुराहटों का जामा ओढ़ता हूँ....


इश्क़ का दस्तूर.

इश्क़ का दस्तूर ये हद हुआ,
जिससे यूँ तो वास्ता नहीं,
वही तसव्वुर पे बेहद हुआ,
गुज़री शाम का नज़ारा वो एक,
मैं पलकें झपक जाऊँ किस कदर,
साया वो खुदसे गुमाऊँ किस कदर....

जिन्दगी के और इक फलसफे को मनाऊँ किस कदर....

चोट करके वक़्त के मरहम जो करती है,
ज़िन्दगी तेरे वजूद में अपना अक्स बनाऊँ किस कदर....

कभी शायद ....

कभी शायद हर किसी की जिन्दगी में ये होता होगा,
कोई दिलअजीज साथ चलते-चलते.
युहीं किसी मोड़ पर राह बदलता होगा,
मुट्ठी बंद यादें रह जाती होंगी,
दिल के कोने में शख्स कोई रोता होगा,
कभी शायद हर किसी की ज़िन्दगी में ये होता होगा....

काँच के ख़्वाब ....

काँच के ख्वाब की ताबीर बस इतनी,
इक महज़ चोट, और, मिले राख बिखरी,
सहला के टुकड़ों को अब देखते क्या हो,
मेरे आइने के धुंधले अक्स खरोंचते क्या हो,

सफर के मुसाफ़िर की तकदीर बस इतनी,
इक महज़ मोड़, और, फिर राह अपनी-अपनी....

ख्याल-ओ-ख्वाब..

ज़िन्दगी गुज़री जिसके ख़्याल -ओ-ख़्वाब में,
उसे तो मेरी गफ़लत का इल्म भी नहीं,
खैर क़सूर उसका भी नहीं,
जिसे तुम चाहो, वो तुम्हे चाहे,
ऐसा तो कोई अब दस्तूर नहीं....

नज़र ....


जहाँ तलक नज़र ठहरी,
तेरा ही तेरा ज़िक्र मिला,
तेरी हँसी मिली,
तेरा गम भी मिला,
कमी पेश आई तो बस इतनी,के,
न तेरी आहट मिली,न तेरा अक्स मिला....

मिलके तुझसे
नादां दिल क्यूँ चाहे तुझे,
ओ मेरे माहिया,
न जाना मैं ये हल्का-हल्का सा नशा है क्या,
मिलता हूँ जब भी तुझसे,
हो जाता हूँ मैं कुछ क्यूँ लापता....

वो है ख्वाब कोई या है कोई हासिल मेरे नसीब का,
रब्बा मेरे अब तू ही दे बता,
ओ बेखबर न जाने तू,
बातें दिल मेरे मासूम की,
दूर जाते तक देखता है तुझे हर मुलाक़ात पे,
नींदों में मुस्कुराता है ये,
तेरे नाम के हर ख्वाब पर,
आ कभी पार उस चाँद के चलें.
बैठ कर दो घड़ी,
कुछ मैं कहूँ,कुछ तू कहे....

,
आजा मिल जा मुझ में,
खुदा मेरा तू है अब बन गया,
तुझसे मिलके हुआ तेरा मैं कुछ ऐसा,
मुझमें मेरा न कुछ अब रह गया....

मिलके तुझसे यूँ लगा है,
बरसों का कुछ मेरा तुझ में बसा है,
बदलनी चाहीं हैं राहें मैंने तुझसे कभी जो,
हर इक राह ने मुझसे कहा है,
वो पिछले उस मोड़ पर तेरा कुछ छूट चला है......

सैड शायरी,sad shayari in hindi
शाम....

वो एक ख़ाली बैच, झुकी गुलमोहर की टहनियों के तले,
वो नीली शाम का नज़ारा,
तेरे दो घड़ी और इंतज़ार के लिए न जाने क्यों दिल का बहाने
बनाना,
याद है मुझे....

हाथ में कोई किताब लिए , ज़हन में तेरा ख्याल लिए,
झुका कर पलकों को,यूँही मुस्कुराना,
याद है मुझे....

तेरे आने पे क्या कहकर तेरा इस्तकबाल करूँ,
तेरे अदब में कोई नज़्म कहूँ,या कोई पाक़ कलाम कहूँ,
इसी सोच में दिन गुज़ारने का वो आलम,
याद है मुझे....

तेरे आने की आहट को महसूस करते हुए दिल का घबराना,
थोड़ा ठहरना,थोड़ा मुस्कुराना,
तिरछी नज़रों से दीदार आज़माना,
याद है मुझे....

वो तेरा गुलमोहर के झरते फूलों की बारिश में सराबोर नज़ारा,
क़िताब अपनी में वो फूलों को सजाना,
बहती नज़र से मुझसे होके गुजर जाना,
देख कर नज़रअंदाज़ करने की वो अदा,
याद है मुझे....

आकर तेरा वो इतराके सिमट कर बैठ जाना,
झुका के नज़रों को भीनी वो मुस्कुराहटें किताब की ओट से
छुपाना,
पलटना वो पन्ने,वो कुछ लफ़्ज़ों को हौले से दोहराना,
याद है मुझे....

चुपचाप यूँहीं चले जाना,
दूर जाकर ठहरना,
पलट कर ढूँढ़ते हुए कुछ यूँही मुझपे नज़र झराना,
याद है मुझे....

सच है मुहब्बत को लफ़्ज़ों का नहीं,
खामोशी में दिल के इशारों का जिक्र चाहिए,
गुफ़्तगू हो न हो,
नज़र में हुजूर की पनाह चाहिए....