For love shayari in hindi/प्यार भरी शायरी हिंदी में

For love shayari in hindi/प्यार भरी शायरी हिंदी में

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ये ज़िन्दगी किसी गूंगे का ख़्वाब है बेटा
संभल के चलना के रस्ता ख़राब है बेटा

हमारा नाम लिखा है पुराने किलओं पर
मगर हमारा मुकद्दर ख़राब है बेटा

गुनाह करना किसी बेगुनाह की ख़ातिर
मेरी निगाह में कार-ए-सवाब' है बेटा

अब और ताश के पत्तों की सीढ़ीयों पे न चढ़
के इसके आगे ख़ुदा का अज़ाब है बेटा

हमारे सेहन की मेहंदी पे है नज़र उसकी
ज़मीनदार की नीयत ख़राब है बेटा


मस्जिद ख़ाली ख़ाली है
बस्ती में क़व्वाली है

हम जैसों से ख़ाली है
दुनिया क़िस्मत वाली है

नूर जहाँ है पहलू में
दिल में सब्ज़ी वाली है

माज़ी हो या मुस्तक़बिल
अपनी वही बेहाली है

दरिया फिर भी दरिया है
जग ने प्यास बुझा ली है

दुनिया पहले पत्थर थी
हमने मोम बना ली है

साया साया ढूंड उसे
जिसने धूप निकाली है

कितनी पी, कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं

शब गुज़ार आया हूँ मस्जिद में के मैखाने में
मुझसे पुछो ना सवालात मुझे होश नहीं

मुझको ये भी नहीं मालूम के जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आँसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा
बिखरे-बिखरे हैं ख़यालात मुझे होश नहीं

मैंने बेहोशी के आलम में बका है क्या-क्या
दिल पे लेना न कोई बात मुझे होश नहीं

कितनी पी, कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं

शब गुज़ार आया हूँ मस्जिद में के मैखाने में
मुझसे पुछो ना सवालात मुझे होश नहीं

मुझको ये भी नहीं मालूम के जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आँसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा
बिखरे-बिखरे हैं ख़यालात मुझे होश नहीं

मैंने बेहोशी के आलम में बका है क्या-क्या
दिल पे लेना न कोई बात मुझे होश नहीं

सूरज, सितारे चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे

साँसों की तरह साथ रहे सारी ज़िन्दगी
तुम ख़्वाब से गए तो ख़्यालात में रहे

हर बूंद तीर बन के उतरती है रूह में
तन्हा मेरी तरह कोई बरसात में रहे

हर रंग हर मिज़ाज में पाया है आपको
मौसम तमाम आपकी ख़िदमात में रहे

दिए बुझे हैं मगर दूर तक उजाला है
ये आप आए हैं या दिन निकलने वाला है

नई सहर है नया ग़म नया उजाला है
रज़ाई छोड़ दो अब दिन निकलने वाला है

ख़्याल में भी तेरा अक़्स देखने के बाद
जो शख़्स होश गँवा दे वो होश वाला है

जवाब देने के अन्दाज़ भी निराले हैं
सलाम करने का अन्दाज़ भी निराला है

सुनहरी धूप है सदक़ा तेरे तबस्सुम का
ये चाँदनी तेरी परछाईं का उजाला है

है तेरे पैरों की आहट ज़मीन की गर्दिश
ये आसमां तेरी अंगड़ाई का हवाला है

मुश्किल से हाथों में खज़ाना पड़ता है
पहले कुछ दिन आना-जाना पड़ता है

ख़ुश रहना आसान नहीं है दुनिया में
दुश्मन से भी हाथ मिलाना पड़ता है

यूँ ही नहीं रहता है उजाला बस्ती में
चाँद बुझे तो घर भी जलाना पड़ता है

तू भी फलों का दावेदार निकल आया,
बेटा पहले पेड़ लगाना पड़ता है

मुश्किल फ़न है ग़ज़लों की रोटी खाना
बहरों को भी शेर सुनाना पड़ता है

क्या खरीदोगे ये बाज़ार बहुत महंगा है
प्यार की ज़िद न करो प्यार बहुत महंगा है

चाहने वालों की एक भीड़ लगी रहती है
आज-कल आपका दीदार बहुत महंगा है

इश्क़ में वादा निभाना कोई आसान नहीं
करके पछताओगे इक़रार बहुत महंगा है

आज तक तुमने खिलौने ही ख़रीदे होंगे
दिल है ये दिल मेरे सरकार बहुत महंगा है

हम सुकूँ ढूंढने आए थे दुकानों में मगर
फिर कभी देखेंगे इस बार बहुत महंगा है

जो हमारे दिल पे गुज़र गई जो तुम्हारे दिल पे गुज़र गई
न हमें पता न तुम्हें खबर न वो हम रहे न वो तुम रहे

कभी हम तुम्हारे क़रीब थे कभी तुम हमारे हबीब थे
मगर अब नहीं कोई मोतबर न वो हम रहे न वो तुम
रहे

कभी रात मन्नते माँगना कभी सुबह देर से जागना
न वो शब रही न रही सहर न वो हम रहे न वो तुम रहे

जो तआल्लुक़ात थे क्या हुए जो तसव्वुरात थे क्या हुए
के वफ़ाए इश्क़ के मोड़ पर न वो हम रहे न वो तुम रहे