romantic shayari for love,love romantic

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मेरी प्यारी दोस्त


क्या बताऊँ उसकी तारीफ मैं चाँद सा मुखरा, अदओं मैं नखरा, उसका यू मुस्कुरना और मुस्कुरा के यू शर्मआना मेरी प्यारी दोस्त मेरी प्यारी दोस्त। फूलो से अच्छी उसकी खुश्बू, कलियों से प्यारी उसकी मुस्कान, सितारो से चमकता हुआ चेहरा, कोयल से उसकी बोली मेरी प्यारी दोस्त मेरी प्यारी दोस्त। नटखट है पर सबसे प्यारी है सब से अलग वी तो दिवानी है हस्ती है और मुझको भी खूब हँसाती है पागल है और मुझे पागल बनाती है

मेरी प्यारी दोस्त

मेरी प्यारी दोस्त। जब कभी मै हो जाऊँ दुखी मेरे साथ बैठकर मुझको खूब समझाती है मुझे जिंदगी जीने का वो सपना दिखाती है मेरी प्यारी दोस्त मेरी प्यारी दोस्त। तुम्हारी हर बात निराली है हमारी दोस्ती सबसे प्यारी है बस कही बदल ना जाना तुम बीच सडक छोड ना जाना तुम मेरी प्यारी दोस्त मेरी प्यारी दोस्त ।

हंसी

रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी, शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी, तेरे पहलू में आके कुछ थम सी गयी है। ये दुनिया मेरी, शाम को भी ना पता था की रात भी ला रही है खुशी, शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी, चाँद से रात का हो रहा है मिलन, चांदनी भी ओढ़े है कोई हया की शरम, घूंघट में छुप के आ रही है रागिनी भी कहीं, मुस्कुराते हुए मिल रही हो तुम भी तो कहीं, रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी, तेरी नजरों ने मेरी नजरों को दे दी है। खुशी, काजल तेरी आँखों का कुछ कह गया है अभी, होंठों पे तेरे भी मुस्कान की छा गयी है हंसी, रात भी ला रही है ओढ़ी हुई हंसी, शाम से धुआँ धुआँ हो रही है हंसी।

 माँ  बाप  एक आशीर्वाद 

 धिक्कार है उन लड़को पर, जो छोड देते है अपने माँ-बाप का साथ लड़की आने पर, लड़की चाहे कैसी भी हो, मगर वो माँ की जगह ना ले पायेगी, ससुर तुम्हारा भले ही तुमसे प्यार करे, मगर वो डाँट वाला प्यार ना दे पायेगा, शाली भले ही तुमसे मजाक करे, मगर को बेहन वाली मस्ती ना दे पायेगी, शाला भले ही तुम्हारी सेवा करे, मगर वो भाई वाली इज्जत ना दे पायेगा, माँ-बाप को अपने से दूर करके, तू पैसे तो बहुत कमा लेगा पर क्या माँ-बाप के प्यार का कर्ज उतार पायेगा, ये मत सोच की दूर होकर माँ-बाप से तू खुश रेह पायेगा, जहाँ जायेगा बिना अपने बाप के नाम के कुछ ना कर पायेगा, दुनिया वालो के लिये चाहे तू कितना भी बड़ा हो जाये, पर तू माँ के लिये सिर्फ नौ महीने ही बड़ा है, तुझे कोई चाहे या ना चाहे,
पर तेरी माँ के लिये तू कल भी छोटा था और आज भी भाई को ही है। और हमेशा वही रहेगा ।

सोचता हूँ में 

सोचता हूँ कभी तो, मुलाकात होगी, कभी न कभी तो, कोई बात होगी, हमें है यकीन, ऐसा आयेगा एक दिन, मेरी जान -ए -मन तू मेरे पास होगी, गले से मैं तुमको लगाऊंगा उस दिन, ये हाल -ए -जिगर मैं बताऊंगा उस दिन, पलक पे बिठाके मैं रखूंगा तुमको, जिगर में भी तुमको बसाऊंगा उस दिन, निगाहों से दूर तुमको होने न दूंगा, इन लबों से हंसी को मैं खोने न दूंगा, चाहे जमाना ही कितना भी जालिम, खुदा की कसम तुझको रोने न दूंगा, तुम रूठा करोगी मैं मनाया करूंगा, उठाऊंगा। मैं सारे गम तेरी खातिर, खुशी तुमको सारे जमाने की दूंगा,
छोटा सा एक घर हमारा भी होगा, एक छोटी सी दुनिया बसायेंगे हम भी, करूंगा मोहब्बत तुमसे मैं इतना, कोई मुश्किल हमें न जुदा कर सकेगी. सोचता हूँ कभी तो मुलाकात होगी, कभी न कभी तो कोई बात होगी...

खैनी गुटका जर्दा पान मसाला 

खैनी, गुटखा, जर्दा, पान मसाला.. पैकेट खोल फट से मुँह में डाला , सस्ता सा ”नशा" मगर होती है शान, हाँ ,मैं भी रखता हूँ ऐब में अपना एक नाम । धीरे-धीरे उस एक रूपए के पाउच ने, ऐसा रस घोला मेर मुँह में , खाली-खाली सा कुछ लगता है , जब पैकेट से मुँह नहीं भरता है । एक अलग सी महक एक अलग सा सुकूं , क्या हर्ज है। इस में जो मैं इसको चबा लूं? लड़की,दारु का शौक नहीं मुझे , सिर्फ तम्बाकू की लत से ही तो दिन बुझे । लम्बे-लम्बे से कश जब ”सिगरेट “ के जलते हैं , कहृलेज की कैंटीन में लड़कियों के दिल मचलते हैं , वो रह-रह के धुओं के छल्ले उड़ाना , सिगरेट पीने का तरीका अपने जूनियर्स को सिखाना । उम्र चौबीस की जैसे ही मेरी आयी, मैं डहृक्टर के पास पहुंचा लेने दवाई ,
भूख लगना एकदम बंद सा हो गया था, हर खाने का स्वाद बेस्वाद हो गया था । मुँह को खोला जब तो दाँत गल गए थे , जुबान पर तम्बाकू के निशान छप गए थे , गालों में बच रहा था सिर्फ कुछ चमड़ी का नजारा , माँ रो रही थी कि बचा लो ये मेरा ”लाल“ है प्यारा । "कैन्सर “ का नाम जैसे ही डहृक्टर ने सुनाया , मेरे पैरों तले की धरती में मानो भूचाल आया , अभी तो इतने सपने बाकी थे मेरे , कैसे छूट गए वो सपने अधुरे। क्यूं इस तम्बाकू को मैंने गले लगाया ? अपनी ही कश्ती को पानी में डुबाया , जीवन जीने की चाह एक ओर तलबगार थी , दूसरी ओर मृत्यु मेरे सर पर सवार थी । बहुत से सपने टूट गए बहुत सी उम्मीदें बह गई , परिवार के लिए न कर सका कुछ उसकी सूनी माँग भी भरने से रह गयी , जलाओ जब भी मुझे तुम शमशान में ले जाकर , एक तस्वीर खींच लेना मेरे खुले हुए मुँह की जनता को दिखाकर ।

पापा “ कहे ..

🥀🥀🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓🤓
पापा🤓🤓🤓🤓 कहे ..
तू छोड़ दे लिखना , हासिल ना होगा तुझे कुछ इस जमाने से । की क्या जाने …
 मुझे क्या सुकून मिले , फिर क्यूं हासिल करूं, मैं कुछ जमाने से ? एक यही तो है आग बाकी जो सुलगती है। अब सीने में , अगर इसे भी बुझा दिया आपने तो बाकी क्या बचेगा फिर जीने में ? ये जरूरी नहीं कि हर शौक की कीमत कोई आकर लगाये ये जरूरी नहीं कि मेरे लेखों की जमाना कभी पढ़कर दिल मैं बसाऐ बस एक जूनून सा लिए मैं लिखने लगा....
यूंही किसी बेताबी में , हाँ एक जूनून सा लिए मैं लिखने लगा ....
 यूंही किसी खुमारी में
 मत रोको मुझे पापा ....
इस लिखने की परछाई से , मत रोको मुझे पापा....
 मेरे अन्दर बसी गहराई से ।
कोई शौक करे मयखाने का, कोई जुए में सब कुछ गंवा बैठा , मैं तो बस शौक रखूं कुछ लिखने का…
उसमे भी ”पापा “ आप रोक रहे , मत करो बेबस मुझे इतना कि मेरा वजूद भी मुझसे आपको छीन ले। घिरने दो मुझे इन शब्दों के भरम में…
 ये एक दिन मेरी आवाज बनेगी , लिखने दो मुझे इस झूठी कलम से…
 इन्ही शब्दों की मेरी एक दिन किताब बनेगी । मत रोक मुझे लिखने से आप…
 करो मेरी भी इस बात का यकीन , जो वफा लिए होते हैं दिल में कहीं

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