shayari for love in hindi

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  • प्यार की बेस्ट २४ शायरीया, 1.दिल गुज़ारिश हैं मेरा, ना हैं धोका कोई। दिल सिफारिश हैं मेरा, ना हैं मौका कोई। दिल तो बंदिश भी हैं गम की रंजिश भी हैं, दिल हैं बहता सा झरना ना झरोखा कोईं फ़ैयाज़ की जानिब से आपको प्यार भरा आदाब कुबूल कीजियेगा। 2. आखो से हो कर तुम्हारी, मई दिल में उतर जाऊंगा। कभी धड़कन बन कर तुम्हारी, तो कभी दिल बन जाऊंगा। अधूरे सपनो को तुम्हारे, एक हकीकत में सजाऊंगा। यादो से हो कर तुम्हारी, यादगार बन जाउँगआ । फ़ैयाज़ की जानिब से आप सभ को सलाम और आदाब । कुबूल फरमाइयेगा। 3. बेवफा जो दिया हैं तुमने, ज़ख्म वो अब तक हरा हैं। दिलको ज़िंदा मारकर के, कहती हो दिल अब भरआ हैं। गम का दे कर फिर अंधेरा, कहती हो वो आसरा हैं। दिल की एक ऐसी चुबन से, दिल का कैसा माजरा हैं। फ़ैयाज़ की जानिब से आपको पहलआ प्यार भरआ सलाम। कुबूल कीजियेगा 4.हुस्न का तुम्हारे , याहा हर कोई दीवाना हैं । एहसास हैं दिल का तुम्ही से , तुम्ही से यह ज़माना हैं । दिल तुम्हारा दिल हमारा , दिल ही दिल का फ़साना हैं । दिल की गलियों में तुम्हारी , दिल हमारा एक तरहाना हैं फ़ैयाज़ की जानिब से आपको ढेर सारा प्यार । कुबूल कीजियेगा । 5.सुनता हूं मय , जब सुनाता हैं कोई । दिल के मीठे बोल जब , लबो पर गुनगुनाता हैं कोई । ना आता हैं कोई , ना तो जाता हैं । कोई । फिर भी रूठे हुवे दिल को , क्यों मनाता हैं कोई । फ़ैयाज़ की जानिब से आपको प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजियेगा । 6.फरिश्तो को इजाज़त हैं , दिल में हमारे । रिश्तो को हिफ़ाज़त हैं , दिल में हमारे । अपनो को इबादत हैं , दिल में हमारे । सपनो को रिवायत हैं । दिल में हमारे । फ़ैयाज़ की जानिब से आपको प्यार वाला सलाम । कुबूल कीजियेगा । 7.आखो में तुम्हारे , कुदरत नज़र आती हैं । कभी खिदमत , तो कभी किस्मत नज़र आती हैं । इश्क में तुम्हारे , दिल की फितरत नज़र आती हैं । बेवफाई में भी तुम्हारे , शिद्दत नज़र आती हैं । फ़ैयाज़ की जानिभ से आपको ढेर सारा प्यार । कुबूल कीजियेगा । 8.तुम समा हो दिल का , और अमानत भी हो । दिल की कैडगाह भी , और ज़मानत भी हो । दिल का दस्तूर हो , और कयामत भी हो । दिल की सूरत हो तुम , दिल की चाहत भी हो । फ़ैयाज़ की जानिभ से आपको प्यार भरा आदाब । कुबूल किजियेगा । 9.मई की छलकती सी प्याली हो तुम । लचकती गुलाबो की डाली हो तुम । चांदनी से भी खुल कर , जो खिल जाए वो , ऐसी रुतबे की वो इश्क वाली हो तुम , ना सवाली हो तुम । ना तो खाली हो तुम ।। आरजू मेरे दिल की कवाली हो तुम । सभ की रौशन हसीना निराली हो तुम । महकती सबेरे की लाली हो तुम । फ़ैयाज़ की जानिभ से आपको पहलआ प्यार भरा सलाम । गौर फरमाइयेगा । 10.दिल के आशियाने में तुम्हारे , एक घर हमारा भी हो , हर चाहत तुम्हारी आदत , और हर ख्वाहिश तुम्हारा इशारा हो । बस धड़कन ही रहे बस में हमारी , दिल पर कब्जा तुम्हारा हो । धड़कनों में तुम्हारे बसने वाला , एक दिल हमारा हो । फैयाज की जानिब से आप को प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 11.यह जमाना बड़ा संगदिल है , मगर इश्क तो फिर भी अजीब है । निगाहों से दूर फिर भी , दिल से जो करीब है । कहीं पर किस्मत है एक दास्तान , तो कहीं वक्त भी अजीब है । जमाना कदरदान हो कर भी , दिल से गरीब है । फैयाज की जानिब से आपको प्यार सलाम । कुबूल कीजिएगा । 12.दिल लुभाने का एक तरीका है , इश्क से मिलने का एक सलीका है । दामन में छुपा रखा है जिसे , न जाने वह फूल किस कली का है । कोई कहता है कि यह इस कली का है , तो कोई कहता है कि वह उस कली का है । जाते जाते ही सही , मगर बताइए , आप तक पहुंचने का रास्ता किस गली का है । फैयाज की जानिब से आपको फिर एक बार प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 13.किस्मत तेरी राहों में मुझे , कुछ लिखावट नजर आती है । पहले कलाम खुशियों का , फिर बगावत नजर आती है ।। किस्मत तेरी खिदमत मैं तू , खुद रुकावट नजर आती है । फासला दो दिलों का पहले , फिर थकावट नजर आती है । फैयाज की जानिब से आप को प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 14.दिल धड़कना नहीं , तू बदल जाएगा । बनके किस्मत का मारा , तू जल जाएगा । ना तो गम का इशारा , ना खुद का सहारा , झूठी यादों से ना तू संभल पाएगा । इश्क है तेरा सच्चा , इरादों से अच्छा , तू है अश्कों का मंजर , पिघल जाएगा । ना तू चल पाएगा , ना संभल पाएगा , जख्म दिल का है गहरा , ना भर पाएगा । फैयाज की जानिब से आपको फिर से प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 15.A सफर है दो दिलों का प्यार है जहां ये ज़िन्दगी । उम्र भर का इंतजार है जहां ये ज़िन्दगी । दिलों का एक करार है समा भी हैं ज़िन्दगी । शायरों की महफिल और शम्मा भी हैं ये ज़िन्दगी । फैयाज की जानिब से आपको प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 16.ना तो शिकवा है कोई , ना गिला है तुमसे । दिल तो महज एक फूल था , जो कभी खिला है तुमसे । ना तो रंजिश है कोई , ना कुछ मिला है तुमसे । एक दर्द था जुदाई का बाकी , अब वह भी मिला है तुमसे । फैयाज की जानिब से आपको फिर से प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 17.ये दिल लगी अभ ज़िक्र सी मालूम होती है । ये ज़िन्दगी एक फिक्र सी मालूम होती है । महकते महकते रहे जाती हैं जो , वो खुशबू भी अब इत्र सी मालूम होती है । फैयाज की जानिब से आपको फिर से प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 18.यह मोड़ है ज़िन्दगी का , या किस्मत का इंतकाम है । कहीं वक्त का तकाज़ा , तो कहीं वक्त भी गुलाम है । ना जाने किस ओर है रुख ज़िन्दगी का दोस्तो , ना समझा है कोई , यहां खिदमत के भी कुछ अनोखे इंतजाम है । कहीं खुश्क हैं ज़िन्दगी , तो कहीं इश्क भी गुमनाम है । रिश्तो की अहमियत आज , हर कदम पर बदनाम है । रिश्ते तो कहलाते हैं फरमान खुदा का मगर , उस खुदा के भी इस जहां में , अनोखे दाम है । 19.ज़िन्दगी एक झलकता जाम है । कहीं बेजूबा सूरत , तो कहीं सूरत ए आम हैं । खुशियों की तलाश की थी जिस जहां में उलझ कर , सुना है वह जहां आज खुद बदनाम है । फैयाज की जानिब से आप को प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 20.वह आए थे खुशियों का संदल समझकर , वह खुशियां हमारी बहा ले गए । उनके सपनों का दे कर हमें वास्ता , सपने दिल के सजाकर कहां ले गए । दिल जहां ले गए , गम जहां दे गए , दिल परिंदा समझकर उड़ा ले गए । दिल जला कर हमारा यू इस आग में , ना जाने कब दिल के टुकड़े कहां ले गए । फैयाज की जानिब से आप को प्यार भरा सलाम । कुबूल कीजिएगा । 21.आबादी तो जश्न हैं दिल का , फिर दिल की बरबादी कैसी । दिल की उलझन दिल ही जाने , फिर दिल की ज़िद आधी कैसी । दिल एक धागा दिल एक वादा , दिल की रुकावट राज़ी कैसी । धड़कन पूरी चाहत अधूरी , दिल की बगावत साधी कैसी । फैयाज की जानिब से आप को प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा । 22.चमकती आंखों से तुम्हारी , यू अश्कों की बहार कैसी । सुलझने पर कश्मकश रिश्तों की , दिलों में एक दीवार कैसी । मुहब्बत तो आइना हैं खुदा की मोजुदगी का , फिर शिकायत दिलों में , और रिश्तों में दरार कैसी । फैयाज की जानिब से आपको ढेर सारा प्यार । कुबूल कीजिएगा । 23.ना हमसफ़र हमारा , ना रास्ता कोई । उनकी झूठी थी कसमें , ना वास्ता कोई । समझ कर भी जो अभ नहीं समझ सके , टूटे दिल की हमारे ये दासता कोई । ना अंदाज़ा था ना अहेसास था कोई । दिल की रुक्सद जुदाई का , राज था कोई । दिल जला कर हमारा , वो मुकर गए , पास हो कर हमारे , ना पास था कोई फैयाज की जानिब से आप को ढेर सारा प्यार । कुबूल कीजिएगा । 24.आरजू मेरे दिल की , कहा ले गई । वफा का सिला , दिल खफा दे गई । जाते जाते भी हस कर किया मुआमला , दिल की रुखसत जुदाई , जहां दे गई । इश्क थी मेरी मंज़िल , जहां वो ले गई । बनके साया वो दिल का , जहां ले गई । दिल लुभा कर हमारा फिर उस दिल में वह , ज़ख्म देने से पहले , दवा दे गई । फैयाज की जानिब से आपको फिर से प्यार भरा आदाब । कुबूल कीजिएगा ।