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hindi shayari for friend|ठोकरें खाकर भी ना संभले ..

" ठोकरें खाकर भी ना संभले  तो मुसाफिर का नसीब, राह के पत्थर तो अपना फ़र्ज़ अदा करते हैं" "अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का, सुकून ढूढनें चले थे, नींद ही गवा बैठे" "हम अच्छे सही पर लोग ख़राब कहतें हैं, इस देश का बिगड़ा हुआ हमें…

hindi shayari | Rahat Indori Shayari

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है, चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है, रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं, रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है। अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​, ज़िन्दगी…