तेरे इश्क़ में सब कुछ लूटा बैठा, मैं तो ज़िंदगी भी अपनी गँवा बैठा,

अब जीने की तमन्ना ना रही बाकी, सारे अरमान मैं अपने दफ़ना बैठा   

 

यह रोग इश्क़ का बहुत बुरा है दोस्तो, आप इस रोग से खुद को बचा लेना,

अगर हँसी कोई नज़रें मिलना भी चहाए, तो आप नज़रों को अपनी हटा लेना   

 

तेरे साथ इतने बहुत से दिन, तो पलक झपकते गुजर गये,

हुई शाम खेल ही खेल में, गयी रात बात ही बात में,

कोई इश्क़ है के अकेला, रेत जी शाल ओढ़ के चल दिया, 

 

अभी तो दूर तक साथ साथ चलना है, वैसे हैं हमसफर पर चलती उनकी आनबान भी,

साथ हरदम नहीं रह सकते चाहने वाले, इश्क़ के साथ दर्द भी,

भारी बरसात बादलों ने दे दिया दॉखा, सुखी नदियो के साथ प्यासे उजड़े उपवन भी,

 

हुस्न मासूम है और सूरतें भोली भली, टूट जाते हैं कभी दिल भी और दर्पण भी   

इश्क़ कैसे होता है..इश्क़ किसको कहते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना 

 

मेरी दुनिया में आया एक मुसाफिर ऐसे, कोई पहले की जान पहचान हो जैसे.. 

\  मिले हम उनसे और वो हुमसे कुछ इस तरहा से, कोई बरसों से बिछड़े हुए हों जैसे.. 

  दिल में प्यार फिर इश्क़ उतरा कुछ ऐसे, और कोई ज़िंदगी में गुंजाइश ना हो जैसे..

  बता दो आए मुसाफिर जाना कहाँ हैं वैसे, अकेले ये सफ़र तय करोगे तुम कैसे..

मिल गये हो तो अब रहना कुच्छ इस तरहा से, की साए भी एक से हो जाएँ जैसे..   

दो मंज़िलें बन जायें अब एक ऐसे, खुदा ने कोई दुआ क़बूल कर दी हो जैसे …!! 

 

एहसास के दामन मे कभी आँसू गिरा के देखो, इश्क़ कितना सच्चा हे कभी आज़मा कर देखो.

मोहब्बत को भूल कर क्या होगी दिल की हालत, कभी कोई आईने को ज़मीन पर गिरा कर देखो. 

 

हर शख्स से उलफत का इक़रार नही होता…!!    हर चेहरे से दिल को कभी प्यार नही होता…!!

  जो रूह को छ्छू जाए, जो दिल मे उतार जाए…!! उस इश्क़ का लफ़्ज़ों में इज़हार नही होता… 

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