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ठोकरें खाकर भी ना संभले  तो मुसाफिर का नसीब,

राह के पत्थर तो अपना फ़र्ज़ अदा करते हैं”

“अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का,

सुकून ढूढनें चले थे, नींद ही गवा बैठे”

“हम अच्छे सही पर लोग ख़राब कहतें हैं,

इस देश का बिगड़ा हुआ हमें नवाब कहते हैं,

हम ऐसे बदनाम हुए इस शहर में,

कि पानी भी पिये तो लोग उसे शराब कहते हैं”      

“लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं,

खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं,

जान बाकी है वो भी ले लीजिये,

दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं”       

“गम इस कदर मिला कि घबराकर पी गए हम,

खुशी थोड़ी सी मिली, उसे खुश होकर पी गए हम,

यूं तो ना थे हम पीने के आदी, शराब को तन्हा देखा,

तो तरस खाकर पी गए हम”

“गम इस कदर मिला कि घबराकर पी गए हम,

खुशी थोड़ी सी मिली, उसे खुश होकर पी गए हम,

यूं तो ना थे हम पीने के आदी, शराब को तन्हा देखा,

तो तरस खाकर पी गए हम”

“तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी,

तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया”

“नशा हम किया करते है, इलज़ाम शराब को दिया करते है,

कसूर शराब का नहीं उनका है जिनका चहेरा हम जाम मै तलाश किया करते है”

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