“क्यों कोई चाह कर महोब्बत निभा नहींपाता,
क्यों कोई चाह कर रिश्ता बना नहीं पाता,
क्यों लेती है जिंदगी ऐसी करवट,
कि कोई चाह कर भी प्यार जता नहीं पाता।”

“पहले कभी ये यादें ये तनहाई ना थी,
कभी दिल पे मदहोशी छायी ना थी,
जाने क्या असर कर गयीं उसकी बातें,
वरना इस तरह कभी याद किसी की आयी ना थी।”

“हमारी दास्तां उसे कहां कबूल थी,
मेरी वफायें उसके लिये फिजूल थीं,
कोई आस नहीं लेकिन कोई इतना बतादो,
मैंने चाहा उसे क्या ये मेरी भूल थी।”

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“तिनका तिनका तूफान में बिखरते चले गये,
तनहायी की गहराईयो में उतरते चले गये,
उड़ते थे जिनके सहारे आसमांन में हम,
एक एक करके सब बिछड़ते चले गये।”

“आंसूं पीते हैं प्यास बुझाने के लिये,
आग हमने ही लगायी थी खुद को जलाने के लिये,
इस जनम में तो मुमकिन नहीं,
और जनम लगेंगे आपको भुलाने के लिये।”

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