”जानते हो महोब्बत किसे कहते हैं ? किसी को सोचना,

फिर मुस्कुराना और फिर आसू बहाते हुए सो जाना.”

 

”क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!!

तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है”

 

”भूल जाने का मशवरा और जिँदगी बनाने की सलाह,

ये कुछ तोहफे मिले थे, उनसे आखिरी मुलाकात मेँ….!!”

 

”ये तेरा वहम है के हम तुम्हे भूल जायेगे..वो शहर तेरा होगा,

जहाँ बेवफा लोग बसा करते है..

अब शिकायतेँ तुम से नहीँ खुद से है.. माना के सारे झूठ तेरे थे..

लेकिन उन पर यकिन तो मेरा था!!”

 

”हमने माँगा था साथ जिसका वो उम्र भर की जुदाई का ग़म दे गया…

हम जी लेते यादों के सहारे उसकी पर जाते-जाते ज़ालिम भूल जाने की क़सम दे गया !!”

 

”हर यार – यार नहीं होता.. हर यार वफादार नहीं होता..

दिल आने कि बात है.. नही तो सात फेरो के बाद भी प्यार नही होता”

 

”कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती,

अगर तू मेरे साथ होती तो”

 

”ना जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की,

वजह ही नही मिल रही मुस्कुराने की….!”

 

”उनकी चाहत में हम कुछ यूँ बंधे हैं

कि वो साथ भी नहीं और हम अकेले भी नहीं…!”

 

”कुछ तो है जो बदल गया ज़िन्दगी में मेरी

अब आईना में चेहरा मेरा हँसता हुआ नज़र नहीं आता.”

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