”पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को; इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था; वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे; शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।”

”तेरे इश्क़ में सब कुछ लुटा बैठा; मैं तो ज़िंदगी भी अपनी गँवा बैठा; अब जीने की तमन्ना न रही बाकी; सारे अरमान मैं अपने दफना बैठा।”

”कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा; वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा; वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गई; दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।”’

”माना कि तुम्हें मुझसे ज्यादा ग़म होगा; मगर रोने से ये ग़म कभी कम न होगा; जीत ही लेंगे दिल की नाकाम बाजियां हम; अगर मोहब्बत में हमारी दम होगा।”

”वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे; हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे; हमें ही मिल गया बेवफ़ा का ख़िताब क्योंकि; हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।”

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