♥सारा गुनाह इश्क़ का, उसपे ही डाल दो मुज़रिम उसे बनाकर मुसीबत को ताल दो ;

ये चमन जहाँ खिला एक फूल मुस्कुराता उसे तोड़कर रकीबों की तरफ उछाल दो ♥

 

♥इश्क़ पर ज़ोर नहीं, यह वो आतिश ग़ालिब; के लगाए ना लगे और बुझाए ना बुझे। ♥

 

♥इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है?

दूर रहकर भी कितने करीब होते है;

मेरी बर्बादी का गम न करो;

ये तो अपने अपने नसीब होते हैं! ♥

 

♥इश्क की बेमिसाल मूरत हो आप, मेरी ज़िंदगी की एक ज़रूरत हो आप,

फूल तो बहोत प्यारे होते ही हे, पर फूलो से भी बहोत खूबसूरत हो आप. ♥

 

♥ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो;

हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के। ♥      

 

♥इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है;

इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून​। ♥

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