आओ किसी शब मुझे टूट के बिखरता देखो; मेरी रगों में ज़हर जुदाई का उतरता देखो; किस किस अदा से तुझे माँगा है खुदा से; आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो।

बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता; जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता; वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ मैं; जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता।

बर्बाद कर गए वो ज़िंदगी प्यार के नाम से; बेवफाई ही मिली हमें सिर्फ वफ़ा के नाम से; ज़ख़्म ही ज़ख़्म दिए उस ने दवा के नाम से; आसमान भी रो पड़ा मेरी मोहब्बत के अंजाम से।

अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे; इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे; उनसे क्या गिला करें, भूल तो हमारी थी; जो बिना दिल वालों से ही दिल लगा बैठे।

हम रूठे दिलों को मनाने में रह गए; गैरों को अपना दर्द सुनाने में रह गए; मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी; हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।

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