इश्क़ मे उनके जान देके , हम भी दिखा देते मगर ,

तभी याद आया की, मोहब्बत तो आँधी होती है . 

 

किताब-ए-इश्क़ में जीतने अल्फ़ाज़ लिखे हैं, दिल में मेरे उठने एहसास रखे हैं.

तुम कह-कर देखते सितंगर, ज़ालिम   मेरे लबों पर कितने तेरे नाम रखे हैं. 

 

शिद्दत – ए – दिल का आलम तो देखिए, क्या दिखे सितारे ज़रा चाँद तो देखिए   

सुकून – ए – ज़िंदगी में ना मिला कभी, इश्क़ क्या करते ज़रा आशिक को देखिए  

रास्तो से सामना ना हुआ मसरूर, क्या मिलते अपने ज़रा मुसाफिर को देखिए .      

 

तेरे इश्क का बुखार है मुझको; और हर चीज खाने की मनाही है;

एक हुस्न के हकीम ने सिर्फ; तेरे चमन की मौसमी बताई है। 

 

 राहे-दूरे-इश्क़ से रोता है क्या​;​​ ​​ आगे-आगे देखिए होता है क्या​​; 

​​​​ सब्ज़ होती ही नहीं ये सरज़मीं​;​ ​​​ तुख़्मे-ख़्वाहिश दिल में तू बोता है क्या​​; 

​​​​ क़ाफ़िले में सुबह के इक शोर है​;​​ ​​ यानी ग़ाफ़िल हम चले सोता है क्या​​; ​​​​

ग़ैरते-युसुफ़ है ये वक़्ते-अज़ीज़​;​ ​​​ मीर इसको रायगाँ खोता है क्या​। 

 

इश्क़ क़ातिल से भी, मक़तूल से हमदर्दी भी;

यह बता किस से मोहब्बत की जज़ा माँगे गा;

सजदा खालिक़ को भी, इब्लीस से याराना भी;

हश्र में किस से अक़ीदत का सिला माँगे गा! 

 

इतना प्यार ना कर के इश्क़ भी, रो पड़ेगा तेरी वफ़ा देख कर,

तुम मिलो ना मिलो पर, रब ज़रूर जल उठेगा, तुम्हारा जुनून देख कर  . 

 

जुनून ए इश्क़, नही रास आया हमें, जब भी देखा आईना,

अक्स उनका ही नज़र आया हमें, तड़पते दिल के ब्यान करें कैसे ?

जब भी कुरेड़ा घाव को, दर्द उनका ही उभर आया  . 

 

इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ, यह खुद बे खुद सामने आता है,

नही बचता इस से कोई भी कभी, यह सब को ही बड़ा तड़पता है   

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