”जाम पे जाम पीने से क्या फायदा दोस्तों,

रात को पी हुयी शराब सुबह उतर जाएगी,

अरे पीना है तो दो बूंद बेवफा के पी के देख,

सारी उमर नशे में गुज़र जाएगी.”

”लबो पे आज उनका नाम आ गया,

प्यासे के हाथ में जैसे जाम आ गया,

डोले कदम तो गिरा उनकी बाहों में जाकर,

आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया.”

”आंखे है उनकी या है शराब का मेहखना,

देख कर जिनको हो गया हूँ मै दीवाना,

होठ है उनके या है कोई रसीला जाम,

जिनके एहसास की तम्मना मे बीती है मेरी हर शाम.”

”हुसन पे जब मस्ती छाती है,

शायरी पर बहार आती है,

पी के मेहबूब की बदन की शराब,

जिन्दगी झूम-झूम जाती है.”

 

”शाम खाली है जाम खाली है,ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है,

सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा,मैने तन्हाई मगर बचा ली है.”

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