“हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें; आकर वो पास हमारे सारा दिन रोते रहे; हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो कि; ओढ़ कर कफ़न, आँखें बंद करके सोते रहे।”

“क्या कुछ न किया है और क्या कुछ नहीं करते; कुछ करते हैं ऐसा ब-खुदा कुछ नहीं करते; अपने मर्ज़-ए-गम का हकीम और कोई है; हम और तबीबों की दवा कुछ नहीं करते।”

“हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे; वो भी पल पल हमें आजमाते रहे; जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया; हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।”

“बढ़ी जो हद से तो सारे तिलिस्म तोड़ गयी; वो खुश दिली जो दिलों को दिलों से जोड़ गयी; अब्द की राह पे बे-ख्वाब धड़कनों की धमक; जो सो गए उन्हें बुझते जगो में छोड़ गयी।”

“न वो सपना देखो जो टूट जाये; न वो हाथ थामो जो छूट जाये; मत आने दो किसी को करीब इतना; कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।”

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